saheedishasocity
Thursday, July 21, 2016
बूंदें पडती हैं छम
मस्त सावन का मौसम चले आइए।
बूंदें पडती हैं छम—छम चले आइए।।
ये बतायेंगे मिलकर तुम्हें रूबरू—
कितने बेचैन हैं हम चले आईए।।
वैद्य सुदेश यादव जख्मी
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