saheedishasocity
Friday, March 24, 2017
माँ
मुझे पाला उसी माँ ने, मेरे बच्चों को पाला है।
सभी में संस्कारों को, उसी माता ने डाला है।।
भले ही आज के बच्चों से पीडित, माँ रहे लेकिन—
कभी माँ ने किसी बेटे को, न घर से निकाला है।।
कवि सुदेश यादव जख्मी
Thursday, March 23, 2017
मां
सकल संसार मां से है, ये ममता प्यार मां से है।
ये हंसता खेलता पूरा, मेरा परिवार मां से है।।
मेरी छोटी सी ये दुनिया, सजाई है मेरी मां ने—
ये घर, घर है उसी मां से मेरा आधार मां से है।।
कवि सुदेश यादव जख्मी
Thursday, July 21, 2016
बूंदें पडती हैं छम
मस्त सावन का मौसम चले आइए।
बूंदें पडती हैं छम—छम चले आइए।।
ये बतायेंगे मिलकर तुम्हें रूबरू—
कितने बेचैन हैं हम चले आईए।।
वैद्य सुदेश यादव जख्मी
Saturday, February 13, 2016
सही दिशा वैलफेयर सोसायटी द्वारा ओयोजित आर0जी0 इण्टर कालिज में सांस्कृतिक कार्यक्रम की झलकियां।
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