Friday, March 24, 2017

माँ





















 मुझे पाला उसी माँ ने, मेरे बच्चों को पाला है।
सभी में संस्कारों को, उसी माता ने डाला है।।
भले ही आज के बच्चों से पीडित, माँ रहे लेकिन—
कभी माँ ने किसी बेटे को, न घर से निकाला है।।
                   कवि सुदेश यादव जख्मी

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